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॥ श्रीहरिः ॥
महर्षि वेदव्यासप्रणीत
श्रीलिङ्गमहापुराण
[ सचित्र, सरल हिन्दी-व्याख्यासहित ]
लिंग थापि बिधिवत करि पूजा । सिव समान प्रिय मोहि न दूजा ॥
ॐ
20000
गीताप्रेस गार
खपुर
GITA PRESS, GORAKHPUR
गीताप्रेस गोरखपुर
1985